बस्ती ,9 अगस्त : फ्यूचर न्यूज :- जनपद बस्ती के बाबा भद्रेश्वर नाथ का कावड़ यात्रा अपने आप में एक मिशाल है, जो अयोध्या सरयू तट से जल भरकर कर भक्त भद्रेश्वरनाथ शिव जी को चढ़ाते हैं। जिसकी शुरुआत महंत नंदा नाथ ने की थी।
अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर से बस्ती के प्रसिद्ध भदेश्वरनाथ धाम तक निकलने वाली कांवड़ यात्रा की शुरुआत भले ही चार दशक से अधिक समय पहले कुछ शिवभक्तों के साथ हुई थी, लेकिन आज यह यात्रा विशाल धार्मिक आयोजन का रूप ले चुकी है। वर्ष 1983 में महंत नंदानाथ उर्फ नंदा बाबा ने इस यात्रा की नींव रखी थी। शुरुआत में सीमित संख्या में शिवभक्त यात्रा में शामिल हुए, लेकिन धीरे-धीरे श्रद्धालुओं का कारवां बढ़ता गया। आज सावन के दौरान अयोध्या की सरयू नदी से पवित्र जल लेकर बड़ी संख्या में कांवड़िये भदेश्वरनाथ धाम पहुंचते हैं और बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
लोगो के अनुसार अयोध्या के नागेश्वरनाथ से भदेश्वरनाथ तक ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा की शुरुआत वर्ष 1983 में महंत नंदानाथ उर्फ नंदा बाबा ने की थी। उस समय यह यात्रा बेहद सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई। कुछ शिवभक्त उनके साथ यात्रा में शामिल हुए। नंदा बाबा ने श्रद्धालुओं को एकजुट कर भगवान शिव की भक्ति और जलाभिषेक की इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
वर्ष 1986 में नंदा बाबा करीब 50 सहयोगियों के साथ ट्रॉली पर भगवान शिव की प्रतिमा, भोजन और अन्य जरूरी सामग्री लेकर यात्रा में शामिल हुए। इस पहल ने आसपास के लोगों को भी प्रभावित किया और धीरे-धीरे यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी।
यात्रा के प्रति लोगों की आस्था लगातार मजबूत होती गई। वर्ष 1990 तक आसपास के गांवों के श्रद्धालु भी इसमें शामिल होने लगे। उस समय कांवड़ियों की संख्या करीब एक हजार तक पहुंच गई थी। शुरुआती दौर में यात्रा तीन दिनों में पूरी होती थी। श्रद्धालु रास्ते में भगवान शिव का जयघोष करते हुए भदेश्वरनाथ धाम की ओर बढ़ते थे।
बढ़ती संख्या ने आयोजकों के सामने व्यवस्थाओं की नई चुनौती भी खड़ी की। इसके साथ ही यात्रा में सुरक्षा, भोजन और विश्राम जैसी सुविधाओं को व्यवस्थित करने की जरूरत महसूस होने लगी।
वर्ष 1995 में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नंदा बाबा ने स्वयं जल लेकर यात्रा करने के बजाय कांवड़ियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और भंडारे की व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया। इससे यात्रा की व्यवस्थाओं को नया स्वरूप मिला। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रास्ते में सेवा कार्यों का दायरा बढ़ाया जाने लगा।
वर्ष 1996 में बोलबम कांवड़िया धर्मशाला की स्थापना की गई। नंदा बाबा इसके संरक्षक बने, जबकि पंकज भईया को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। धर्मशाला के माध्यम से यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार हुआ। यह स्थान कांवड़ियों के ठहराव और सेवा व्यवस्था में महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। वर्ष 2000 के बाद यात्रा में अयोध्या और बस्ती के अलावा आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुड़ने लगे। कांवड़ियों की संख्या बढ़कर लाखों तक पहुंचने लगी। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजकों के सामने सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती भी बढ़ी। वर्ष 2006 में अयोध्या-बस्ती मार्ग पर कांवड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था में विशेष बदलाव किए गए। यात्रा के दौरान मार्ग को कुछ समय के लिए बंद कराने की व्यवस्था भी की गई, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुरक्षित तरीके से हो सके।
वर्ष 2007 में हिंदू युवा वाहिनी की जिला इकाई, जिला अध्यक्ष पंकज भईया के सहयोग और जिला चिकित्सालय के समन्वय से यात्रा मार्ग पर चिकित्सा शिविर लगाए जाने की व्यवस्था शुरू हुई। इसके साथ ही कांवड़ियों के लिए अल्पाहार और भंडारे की व्यवस्था भी बढ़ाई गई। सेवा भाव से जुड़े लोगों और संगठनों की भागीदारी लगातार बढ़ती गई।
वर्ष 2008 आते-आते भदेश्वरनाथ कांवड़ यात्रा ने विशाल धार्मिक महाआयोजन का रूप ले लिया। चार दशक से अधिक समय पहले नंदा बाबा द्वारा शुरू की गई यह यात्रा आज बस्ती की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। अयोध्या की सरयू से जल लेकर भदेश्वरनाथ धाम तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग, सुरक्षा और सामाजिक सहभागिता का भी बड़ा उदाहरण बन गई है। छोटी-सी शुरुआत से निकला यह कारवां हर सावन में बढ़ती आस्था के साथ नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
रिपोर्ट ,बस्ती ब्यूरो : फ्यूचर न्यूज
